
चंबा। चमेरा प्रथम चरण विस्थापित लोगों ने अपनी समस्याओं को लेकर एक बैठक आयोजित की। इसमें उपस्थित सभी विस्थापितों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश की किसी भी सरकार ने चमेरा प्रथम चरण विस्थापितों के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर 28 फरवरी तक उनको न्याय दिलाने के लिए सरकार व प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया तो सभी प्रभावित उपायुक्त कार्यालय के बहार अमरण अनशन पर बैठ जाएंगे। इस मौके पर चमन सिंह, विजय कुमार, सुभाष कुमार, बलदेव सिंह, शीला देवी, ओम प्रकाश, नीशा देवी, भूपेंद्र सिंह, विमला देवी, सुषमा देवी, सुरेंद्र, विशाल, अनिल, रजनी, राधा, चिंतो, संतोष, सुभाष, सरोज, विरेंद्र, सुमन, ओम, कमला, कमल, रचना, तानया, दुर्गा, पूजा, प्रियंका, पंकज, करन, रवि, बबीता, संतोष, विमल, रानी सहित अन्य विस्थापित मौजूद रहे। उन्होंने पूर्व सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि रोजगार भी उन लोगों को दिया गया था, जो इसके योग्य नहीं थे। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने झूठे रिकार्ड तैयार करके सरकार के वरिष्ठ अधिकारियोें और विभिन्न न्यायालयों को गुमराह करके सच को दबाया है। शर्त के अनुसार हर विस्थापित परिवार के एक सदस्य को रोजगार, घर के लिए 10 बिस्वा भूमि और पांच बीघा भूमि खेती के लिए देने का प्रावधान है। विस्थापितों को हर अधिकार से वंचित रखा गया। विस्थापितों ने बताया कि सूचना के अधिकार से निकाले गए सभी झूठे रिकार्ड उपायुक्त चंबा को प्रमाण सहित मुहैया करवाए गए, मगर इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री तक को पत्र भेजे, मगर उन पर भी कोई असर नहीं हुआ। तत्कालीन अधिकारियों ने कोर्ट के आदेशों तक का पालन नहीं किया। वस्थापितों की वर्तमान सरकार व प्रशासन से मांग है कि हर विस्थापित को अलग-अलग देख कर न्याय दिलाया जाए। इस संबंध में 12 फरवरी को उपायुक्त को एक प्रार्थना पत्र भी सौपा गया है। इसमें चेतावनी दी गई है कि अगर 28 फरवरी तक उन्हें न्याय नहीं दिलाया गया तो विस्थापित आमरण अनशन पर बैठेंगे।
